भारत का महाबंद पर क्या हुआ असरमंद ?

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जनता कुछ भी करले पर सरकार के कानों मे जूँ तक नही रेंगती । कभी नारेबाज़ी, कभी जुलूस ओर कभी पुतला फूँकना, पर सरकार चिकना घड़ा । जनता का यह आक्रोश 20 सितंबर भारत बंद के रूप मे सामने आया । भारत सरकार एक बार फिर FDI के रूप मे भारत को गुलामी के गहरे गर्त मे
धकेलना चाहती है । देश को बेच देना चाहती है देश भर मे जनता इसके विरोध मे सड़क पर उतरी थी । पर आख़िर मे क्या हुआ एक दिन गुज़रते हुई फिर से वही महगी जिंदगी । सरकार फिर कपड़े झाड़ के खड़ी हो गई । नुकसान किसे हुआ देश की आर्थिक व्यवस्था को । पहले से ही आर्थिक तंगी झेल रहे भारत ने एक दिन की बंद की वजह से अरबों का नुकसान झेला और सरकार को भला क्या नुकसान होने वाला था । प्रधानमंत्री जी के कोष कोएला घोटाला करके इतना भरा हुआ है की इनकी सात पुसते बैठ के ऐश कर सकती है।
बल्कि सरकार ने जनता के ज़ख़्मों को कुरेदने का ही कार्य किया । जगदम्बिका जी का बयान आया की अब तो बंदी फ़ैसन बन गया है ओर दूसरी ओर प्रधान मंत्री जी ये कहते नज़र आए की १७ रूपये बढ़ाने चाहिए थे, पर केवल ५ रूपये ही  बढ़ाए । जनता का सब्र का बाँध बस टूटने ही वाला है और जब ये बाँध टूटेगा तो सरकार गद्दी से नही देश से भी बाहर कर दी जाएगी ।
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