मेरे देश की जनता मौन है,
पर वो जानती है ये कौन है,
ये देश को टुकड़ो मे हैं बाट रहे,
दीमक बनकर हैं चाट रहे
ये मेरे देश के नेता है
देश को इसने लूटा है
नेताओं का नारा है
"देश का पैसा हमारा है"
जनता के धन से वो अपना कोष भरता है
देश की गलियों मे हर रोज कोई भूखा मरता है
कुर्सी मिलने से पहले इनके पास हर समस्या का निदान होता है
कुर्सी मिलने के बाद हर एक नेता बेईमान होता है
हज़ारों मुक़दमे मेरे देश के नेता का सम्मान है
किसी के सीने का मेडिल तो किसी के सर का ताज है
कोई घोटालों का मेडल तो कोई अस्मत लूटने का ताज लिए बैठे हैं
हर रोज देश की अस्मत नीलामी के लिए तैयार रहते हैं
नेताओं मे मारा मारी है, लड़ने की इनको बीमारी है
नेताओं मे ईमान नही पर इनसे जाड़ा कोई धनवान नही
आम आदमी खुद्दार है पर पीसने को वो लाचार है
कभी बुजुर्गों से सुनते थे अपने वतन की कहानी
आज देखते हैं उसी के पतन की कहानी
पहले के नेताओं का दौर ही कुछ और था
पहले के नेता कहते थे "तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आज़ादी दूँगा"
आज के नेता कहते हैं " तुम मुझे कुर्सी दो मैं तुम्हे बर्बादी दूँगा"
अब जनता को कुछ करना होगा, अब तो आगे बढ़ना होगा
वरना हर घर का चूल्हा शमशान बनेगा,
फिर कोई अंग्रेज मेरे देश का मेहमान बनेगा
फिर से लूट जाएगी मेरे देश की आबरू,
और फिर से मेरा वतन गुलाम बनेगा
इस कहानी का ऐसे कैसे मैं अंत करूँ
आख़िर मेरा भी कोई ईमान है
भले ही मेरे देश का नेता बैईमान है
"पर मेरा भारत महान है"
जय हिंद जय भारत
Swati Gupta
पर वो जानती है ये कौन है,
ये देश को टुकड़ो मे हैं बाट रहे,
दीमक बनकर हैं चाट रहे
ये मेरे देश के नेता है
देश को इसने लूटा है
नेताओं का नारा है
"देश का पैसा हमारा है"
जनता के धन से वो अपना कोष भरता है
देश की गलियों मे हर रोज कोई भूखा मरता है
कुर्सी मिलने से पहले इनके पास हर समस्या का निदान होता है
कुर्सी मिलने के बाद हर एक नेता बेईमान होता है
हज़ारों मुक़दमे मेरे देश के नेता का सम्मान है
किसी के सीने का मेडिल तो किसी के सर का ताज है
कोई घोटालों का मेडल तो कोई अस्मत लूटने का ताज लिए बैठे हैं
हर रोज देश की अस्मत नीलामी के लिए तैयार रहते हैं
नेताओं मे मारा मारी है, लड़ने की इनको बीमारी है
नेताओं मे ईमान नही पर इनसे जाड़ा कोई धनवान नही
आम आदमी खुद्दार है पर पीसने को वो लाचार है
कभी बुजुर्गों से सुनते थे अपने वतन की कहानी
आज देखते हैं उसी के पतन की कहानी
पहले के नेताओं का दौर ही कुछ और था
पहले के नेता कहते थे "तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आज़ादी दूँगा"
आज के नेता कहते हैं " तुम मुझे कुर्सी दो मैं तुम्हे बर्बादी दूँगा"
अब जनता को कुछ करना होगा, अब तो आगे बढ़ना होगा
वरना हर घर का चूल्हा शमशान बनेगा,
फिर कोई अंग्रेज मेरे देश का मेहमान बनेगा
फिर से लूट जाएगी मेरे देश की आबरू,
और फिर से मेरा वतन गुलाम बनेगा
इस कहानी का ऐसे कैसे मैं अंत करूँ
आख़िर मेरा भी कोई ईमान है
भले ही मेरे देश का नेता बैईमान है
"पर मेरा भारत महान है"
जय हिंद जय भारत
Swati Gupta
