क्या अपने ही देश में सुरक्षित नहीं हैं हम

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समय के साथ ही ये सच सबके सामने आ गया की नॉर्थ-ईस्ट में हुई गन्दी शाजिश की अपवाह के पीछे कोई और नहीं बल्कि पकिस्तान था और अब दोनों देशो के बीच राजनितिक तकरार भी शुरू हो गयी है, मगर सवाल ये नहीं की हमारा भला न चाहने वाले पकिस्तान ने ऐसी हरकत क्यों करी सवाल तो ये है की क्या हमारे अपने प्रजातंत्र और व्यवस्था की बुनियाद इतनी कमजोर है की हमारी जनता को उनकी सुरक्षा का आश्वासन नहीं दिला सकती  .
 साथ ही इस बात पर भी बड़ा सवालिया निशान लगता है की आज़ादी के ६५ साल बाद भी हम अपने देश में खुद को महफूज नहीं कह सकते क्यूंकि अभी भी हम राष्ट्रवाद की ज़ंजीरो में जकड़े हुए हैं और कब तक आखिर ये राष्ट्रवाद इस देश की विकास को जकड़े रहेगा, आखिर वो कौन सा दिन होगा जब यू.पी. का आदमी महाराष्ट्र में खुद को और बिहार का आदमी आसाम में खुद को पूरी तरह सुरक्षित पायेगा.
अगर वो तारीख जल्द ही न आई की जब देश का हर नागरिक खुद को हर जगह सुरक्षित महसूस करे तो वो दिन दूर नहीं जब इस देश के और टुकड़े होने का दिन नजदीक आजायेगा .
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