जिन्दगी आम है ख्वाहिशें तमाम हैं

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जिन्दगी चाहे जितनी भी आम होती है ।
ख्वाहिशें सभी की तमाम होती है ।।

आँखों में हज़ारों सपने लिए, निगाहें तलाशती हैं राहें।
उम्मीदों के साथ चल देते हैं कदम, चंद खुशियों के वास्ते ।
कुछ राहों में मिलती है खुशियाँ, तो कहींगम भी मिलते हैं।
कभी हम ठोकर खाकर गिरतें हैं , तो कभी गिरकर संभलतें  हैं ।
उम्र चाहे जितनी भी बीत जाए, ख्वाहिशों की उतनी ही ऊंची उड़ान होती है।
जिन्दगी चाहे जितनी भी आम होती है ।
ख्वाहिशें सभी की तमाम होती है ।।

कभी ख्वाहिशें दिल में ही दम तोड़ देती हैं ।
कभी ख्वाहिशें साँसों से नाता जोड़ लेती हैं ।
कभी ख्वाहिशों में ही अपना संसार लगता है ।
कभी ख्वाहिशों के बिना जीना बेकार लगता है ।
चाहे जितना भी हो घना अँधेरा,
हम उम्मीदों का दिया जला लेते हैं ।
चाहे सब कुछ लुट जाए फिर भी,
ख्वाहिशों की नयी दुनिया बसा लेते हैं ।
ख्वाहिशें बड़ी हों या छोटी, हर दिल का अरमान होती हैं ।
जिन्दगी चाहे जितनी भी आम होती है ।
ख्वाहिशें सभी की तमाम होती है ।।

By
स्वाती गुप्ता
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