भारत ने न्यूजीलैंड को 2-0 हराकर एक बार फिर कीवी टीम के भारत में टेस्ट मैच जीतने के 24 साल के सपने को तोड़ दिया हैं। इससे पहले 1988-89 में न्यूजीलैंड ने भारत को बाम्बे (अब मुंबई) टेस्ट में 136 रन से हरा दिया था।
हाल ही में हुई सीरिज़ में भारत की ओर से विराट कोहली , पुजारा, धोनी और सुरेश रैना ने बल्लेबाजी में और अश्विन , ओझा ने गेंदबाजी में काफी अच्छा प्रदर्शन करा हैं। क्रिकेट एक टीम गेम हैं इसमे हर खिलाड़ी को अपना अपना योगदान देना पड़ता हैं,चाहे फिर योगदान कम क्यों ना हो वो योगदान टीम की जीत और हार में महत्वपूर्ण रहता हैं।
इस सीरिज़ के पहले टेस्ट मैच में पुजारा ने शानदार शतक लगाया था। इस शतक के लगते ही सब उन्हें भारतीय टेस्ट टीम की नयी दीवार कहने लगे हैं, परन्तु खुद पुजारा का मानना हैं के राहुल द्रविड़ के बराबर पहुचने में उन्हें काफी वक्त लगेगा। साथ ही सहवाग ने भी पहली पारी में तेज गति ने 47 रन बनाए थे। जो बड़ा स्कोर खड़ा करने में मददगार थे।
पहले टेस्ट को भारत ने एक पारी और 115 रन से जीत लिया था। मेहमान टीम ने पहली पारी कुल जीतने रन बनाए उतने तो अकेले पुजारा ने बना लिए थे। न्यूजीलैंड के बल्लेबाज फिरकी के जाल में इस तरह फसे के फिर वहा से बाहर निकलने का एक ही रास्ता था, वो था इस टेस्ट मैच में हार और ये हल मेहमान टीम ने चार दिन में ही ढूंढ़ लिया या फिर ये कहे के भारत की टीम ने उन्हें इस हल को ढूंढने में काफी मदद की थी।
दुसरे टेस्ट में मेहमान टीम ने पहले दिन जैसा उसे देखकर लगा के क्या ये वही टीम हैं जो पहले टेस्ट में खेली थी। पहले दिन 328/6 पर बनाकर न्यूजीलैंड ने ये संकेत दे दिए थे के इस टेस्ट मैच में भारत की झोली में जीत नहीं डालेंगे और लड़कर इस टेस्ट मैच को जीतने की कोशिश करेंगे।
दुसरे दिन 365 रन पर आउट होने के बाद भारत के 4 विकेट सिर्फ 80 पर गिरा कर न्यूजीलैंड ने इस टेस्ट मैच के जरिये सीरिज़ में वापसी के संकेत दे दिए थे। परन्तु उस वक़्त भारतीय टीम का नया युवा संकटमोचक खडा हो गया और बेहतरीन शतक लगाकर भारत की डूबती नाव को पार लगा दिया। कोहली ने रैना के साथ 98 रन और धोनी के साथ 122 रन की बेहतरीन भागीदारी की और 103 रन बनाये।
दूसरी पारी में मेहमान टीम संभल कर खेल रही थी और तभी वो हुआ जो उन्होंने सोचा नहीं होगा। फिरकी गेंदबाजों को विकेट ना देने के चक्कर में 2 विकेट उमेश यादव की झोली में चले गए और फिर कीवी टीम का पाँव फिसला तो भारत के फिरकी गेंदबाजों ने संभलने का मौक़ा नहीं दिया।
भारत को जीत के लिए 260 रनों का लक्ष्य मिला जो भारत ने 5 विकेट गवाकर बना लिया। धोनी की कप्तानी में भारतीय सरज़मी पर ये भारत की 14वी जीत हैं। इससे पहले मोहम्मद अजहरुद्दीन के नाम अपनी कप्तानी में भारतीय सरज़मी पर सबसे ज्यादा टेस्ट मैच जीतने का रिकॉर्ड था। 
इस सिरीज़ जीत में अगर किसी बात की कमी खली तो वो सिर्फ सचिन के रन ना बनाने की, देखा जाए तो सचिने के प्रशंसको में इस बात का सबसे ज्यादा दुःख हुआ हैं के वो तीन बार बोल्ड आउट हुए हैं। जो सचिन जैसे महान खिलाड़ी के परिद्रश्य से एक अचरज भरी बात हैं। पूर्व क्रिकेटर और भारतीय टीम के पूर्व टेस्ट कप्तान सुनील गवास्कर का कहना हैं के अब सचिन के रीफ्लेसेस कम हो गए हैं, जो उम्र के इस पड़ाव पर हर खिलाड़ी के साथ होता हैं।संजय मांजरेकर ने भी गवास्कर की बात का समर्थन करते हुए सचिन को अब संन्यास लेने की सलाह दे डाली, हालाकि वो इस बात से आज पलट गए हैं।
सचिन एक महान खिलाड़ी हैं।उन्हें क्रिकेट का भगवान यू ही नहीं कहा जाता है। उनके रिकार्ड, उनका जज्बा और उनकी विनम्रता इस बात की हमेशा पुष्टि करती हैं। उन्हें आउट करने के लिए विरोधी टीमे नए नए तरीके खोजती हैं। सचिन हर बार उनके तरीके को अपने बल्ले के दम से विफल कर देते हैं।
सालो पहले सचिन आफ-स्टम्प के बाहर की गेंदों पर गली या पाईंट पर कैच आउट होंने लगे थे। लेकिन उन्होंने विरोधी टीम की इस रणनीती का जवाब बखूबी तरीके से दिया था। उन्होंने आस्ट्रेलिया में दोहरा शतक लगाया था, जिसमे उन्होंने आफ-स्टम्प की बाहर की गेंदों को बडे एहतियात से खेला था।
कोई दूसरा खिलाड़ी होता तो शायद तीन पारियों में बोल्ड आउट होने के बाद निराश हो जाता, परन्तु सचिन ने इस परेशानी का हल ढूंढना शुरू कर दिया होगा और आगे आने वाली इंग्लैंड सीरिज़ में वो फिर से अपने महान होने का सबूत देकर अपने आलोचकों को करार जवाब देंगे।
न्यूजीलैंड की टीम भले ही कमज़ोर थी। परन्तु फिर भी भारतीय टीम ने अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन करा हैं। कई सालो बाद भारत की टीम राहुल द्रविड़ और वी .वी .एस लक्ष्मण के बगैर मैदान में उतरी थी। ये वक्त तरकीबन वैसा ही हैं, जब सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ ने साथ ही में क्रिकेट के मक्का " लार्डस " में अपने करियर की शानदार शुरुवात की थी. उस वक्त किसी ने नहीं सोचा होगा के ये आगे चल कर भारतीय क्रिकेट को इतना आगे ले जायेंगे। उम्मीद करते हैं के पुजारा, कोहली,रैना जैसे सितारे भी इन्ही की तरह भारतीय क्रिकेट को और आगे ले जाए।
( चिराग जोशी )