असीम त्रिवेदी जो पेशे से राजनितिक कार्टूनिस्ट है उन्हें मुंबई पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया ,असीम ने न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए मुंबई में जाकर गिरफ्तारी दी क्योकि यह गिरफ्तारी असीम ने इसलिए दी है कि कुछ दिन पूर्व मुंबई पुलिस उनके निज निवास शुक्लागंज बिना किसी नोटिस के आ धमकी थी और उस समय असीम घर पर मौजूद नही थे वो किसी काम से दिल्ली में थे असीम के न होने के बावजूद भी स्थानीय और मुंबई पुलिस द्वारा उनके माता -पिता को परेशान किया गया जब यह बात असीम के संज्ञान में आयी तो असीम फ़ौरन दिल्ली से शुक्लागंज गिरफ्तारी देने के लिए रवाना हो गये और गिरफ्तारी देने के लिए स्थानीय पुलिस शुक्लागंज गंगाघाट थाने पहुचे तो उन्हें ये बताया गया कि मुंबई पुलिस तो यहाँ से जा चुकी है तो इस बात पर असीम ने ये कहा है कि मै गिरफ्तारी देने आया हूँ तो स्थानीय पुलिस ने कहा ये मामला मेरा नही इसलिए हम आपको गिरफ्तार नही कर सकते इस पर आई. ए. सी . और असीम समर्थकों का गुस्सा फूट गया और थाने के सामने धरने पर बैठ गये जिस पर पुलिस और प्रशासन द्वारा काफी समझाने के बाद समर्थक शांत हुए और फिर असीम ने वहीँ ये निर्णय लिया कि देशद्र्हो जैसे केस उनके ऊपर लगे हुए है वो भी उनके द्वारा बनाये गये कार्टून पर लगाए हैं जो अभिव्यक्ति कि आजादी पर करारा प्रहार है और जिसके कारण वो मुंबई में जाकर गिरफ्तारी देंगे और न्यायपालिका संविधान का सम्मान करते हुए उन्हें बाइज्ज़त बरी कर देगी और उन्होंने ये भी कहा है कि मै न्यायकि प्रक्रिया का सम्मान करता हूँ इसलिए मै उसमे बाधा नही बनना चाहता और न्यायपालिका पर मुझे पूरा भरोसा |
असीम पर राजद्र्हो और साइबर क्राइम जैसे मुक़दमे उनके द्वारा बनाये गये भ्रष्टाचार के कार्टूनों पर लगाए गये हैं जो अन्ना अनशन के मुंबई बांद्र- कुर्ला काम्पेलक्स के एम्.एम्.आर.डी. ग्राउंड में प्रदर्शित किये गये थे जिस कारण उनकी साईट Cartoons Against Corruption को मुंबई पुलिस द्वारा बिना किसी नोटिस के बैन कर दिया गया था , जिस पर कार्टूनिस्ट द्वारा अभिव्यक्ति आजादी पर यह प्रहार बर्दाश्त न किया जा सका और कार्टूनिस्ट ने अपने सभी कार्टूनों को अपने ब्लॉग Cartoons Against Corruption पर पोस्ट कर दिए और अभिव्यक्ति कि आजादी कि लड़ाई लड़ने के लिए २५ वर्षी कार्टूनिस्ट ने save your voice कि स्थापना कि और वेबसेंसरशिप के खिलाफ जंतर -मंतर पर ७ दिन कि भूख हड़ताल और फ्रीडम आफ द केज जैसे बड़े - बड़े अपनी आवाज़ को बचाने के लिए साहसिक कार्यक्रमों का आयोजन कर सरकार से लोहा लिया , सरकार कि तानाशाही और अभिव्यक्ति कि आजादी पर सरकार द्वारा लगाये जा रहे अंकुश का खुलकर का विरोध किया | असीम के अनुसार जेल में रहकर भी अभिव्यक्ति आज़ादी कि लड़ाई जारी रहेगी क्यूँकि सविधान के मौलिक अधिकारों को हमसे कोई नही छीन नही सकता और उनका यह भी कहना है कि देश-द्रोह का मुक़दमा उनके ऊपर लगा हुआ है वो ब्रिटिश कानून के अनुसार है और हमारे देश को आज़ाद हुए ६५ वर्ष और सविंधान बने ६२ वर्ष हो चुके है फिर ये क़ानून कैसे लागू हो सकता है मै ऐसे क़ानून को नही मानता और इस क़ानून का खुले रूप से विरोध करता हूँ और सरकार अपने खिलाफ बोलने वालों का मुंह बंद करना चाहती है इसके लिए किसी हद भी हद गिर सकती है है पर सरकार भूल गयी है ये सबसे बड़ा जन लोकतान्त्रिक देश है यहाँ सब सरकार के हिसाब से नही जनता के हिसाब से चलता है पर लगता है सरकार ने हिटलर कि तानाशाही वाला अड़ियल रवैया अपना रखा है जो अपनी गलती स्वीकारने को तैयार ही नही है |
जिसका खामियाजा सरकार को खुद भुगतना पड़ेगा | वही असीम के माता -पिता का कहना है कि वह असीम के कार्य से संतुष्ट है और एक नाते से असीम के माता -पिता होने के कारण उन्हें भी जेल में भी डाल देना चाहिए, हमे अपने बेटे पर गर्व है | असीम के मुकदमे का फैसला न्यायपालिका के पास सुरक्षित है अभी अदालत ने असीम को ७ दिन कि पुलिस कस्टडी भेजा है |
