यूपीए-2 और कांग्रेस की घटती साख को बदलाव कर बचाने की कवाय़द तेज

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एक के बाद एक घोटालों का खुलासा उसके बाद सवैंधानिक संस्था सीएजी से कैबिनेट के मुखिया प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का दो टुक चुनौती भरा रवैयां.आएं दिन केजरीवाल का समस्त राजनीतिक जमात को एक तराजू में तोलना जिसमें अभी तक कांग्रेस का भ्रष्टाचार रूपी हैवान वजन दर वजन अधिक मोटा रहना.लोगों में एक स्पष्ट संदेश जाने लगा कि यह सब बातें झुठी हैं जो चुनावों के समय सुनाई जाती थी- "कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ" .. इसी के परिणम स्वरूप पहले मुख्यमंत्री के बेटे साकेत की उत्तराखंड की टीहरी लोकसभा उपचुनाव में हार और राष्ट्रपति प्रणब मु्खर्जी के बेटे अभिजित का 2500 वोटों से एक मामूली सी जीत दर्ज करना.जबकि,बंगाल में इस समय सबसे ताकतवर दल टीएमसी ने जंगीपुर से कोई प्रत्याशी नही खड़ा किया था.इसी सीट से प्रणब 2009 लोकसभा चुनाव में डेढ़ लाख वोटों से जीते थे.मतलब साफ़ हैं कि यदि,इस समय लोकसभा चुनाव हो जाते हैं तो मोजूदा राजनीतिक घटनाक्रम कांग्रेस का हाथ मरोड़ देगा.गौर करने वाली बात हैं कि इन सब पतन की ओर जाती राजनीति के बावाजूद भी केंद्र में बैठे श्रद्धास्पद मंत्री महोदय जिस 'तल्खी' और 'अहंकार' से अपना बचाव करते हैं वो कैमरों पर एक ही स्पष्ट संदेश देती हैं की इस सरकार को अपने किये पर कोई अफ़सोस नही हैं,ना ही तमाम आरोपों पर अपना पक्ष रखना ये उचित समझती हैं.लंबे समय से चली आ रही सूत्र ख़बरे अब सत्यापित होने लगी हैं.केंद्रिय मंत्रिमंडल में 'सूरते' बदलने को तैयार हैं.स्वाभाविक सी बात हैं यह बदलाव आम फेरबदल से नही हैं,इन में कुछ खास़ हैं."एस.एम कृष्णा" का अपने पद से इस्तीफा उस समय हुआ जब हाल ही में कर्नाटक लोकायुक्त ने मैसूर-बैंगलोर एक्सप्रेस हाईवे के लिए जमीन अधिग्रहण के मामले में कृष्णा के खिलाफ़ जांच के आदेश दिए,वही सुबोधकांत सहाय का नाम पहले ही कोयला घोटाले में आ चुका हैं,दूसरी तरफ़ संगठन का लचर होना समय,समय पर कांग्रेस को सताता रहा हैं..जिसके लिए अंबिका सोनी,मुकुल वास्निक,गुलाम नबी आज़ाद को मैदान में उतारा जा रहा हैं. देखना होगा क्या सूरत बदलने से सीरत में कुछ बदलाव आएगा..


लेखक-अंकित

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