मलाला अपने आप में एक बुलंद आवाज हैं जो बताती हैं की कट्टरपंथी चरमपंथी सोच,विचार,मुल्क को पतन की ओर नही लें जा सकते.उन्हें इसकी इजाजत नही हैं.हमें चाहिए तो सिर्फ शांति और एक ऐसी आवाम जो शिक्षत हो.मलाला महज 14 वर्षिय बच्ची हैं.. जिसने वो कर दिखाया जो इस उम्र के बच्चे अधिकांश सोचते तक नही हैं.हमें मलाला से सीखना चाहिए कि उम्र हमारे हौसलों और जज्बों को हमारी मंजिल तक नही पहुंचाती.पहुंचाता हैं तो वो हैं हमारा अटूट संकल्प जो किसी भी बहाव में टूटता नही.मलाला जानती हैं शुरूआत से ही की वो जिस स्वात घाटी में शिक्षा या महिलाओं की आज़ादी की बात कर रही हैं.जिस तालिबान से वो टकरा रही हैं वो उसे नुक्सान पहुंचा सकता हैं.लेकिन उसने एक इंटरव्यू में कहा की उसे इस बात का खौफ़ नही.और देखिए,मलाला की दोस्त भी कितनी बहादुर निकली के जब कुछ तालिबानी स्कूल बस में घुस कर पूछते हैं के मलाला कौन हैं ? तब भी वे लड़किया बूंदूक की नोक से डरती नही.चुप रहती हैं,नही बताती उन्हें.पाकिस्तान भर में किस कदर अमेरिकी कूटनिति के तहत तालिबान ने अपने पैर पसारे इस बात से सब परिचित हैं.देखने वाली बात हैं की एक बच्ची के डटे रहने से लोग सड़को पर निकल कर मलाला पर हुये इस काय़र हमले का विरोध कर रहें हैं.बरसों की जलालत जो उन पर थोपी जाती रहीं उसके खिलाफ़ बुलंद आवाज उठा रहें हैं.देखना होगा की यह बदलाव क्या पाक भविष्य के लिए एक मिशाल बनेगा.पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ के अध्यक्ष इमरान खान ने इस हमले की निंदा तो की पर खुल कर तालिबान का नाम तक ना लें सके,इस से आप अंदाजा लगा सकते हैं के यह लोग कितने ख़तरनाक हैं जिन्हें एक बच्ची ने हिला कर रख दिया.मलाला का हथियार उसका कलम बना,उसकी आवाज बनी,उसके वो साथी बने जो हर पल उसके साथ हैं.
लेखक -अंकित मुटरिजा संपर्क करने के लिए क्लिक करें (http://www.facebook.com/ ankit.mutreja.5?fref=ts)
