सचिन रमेश तेंडुलकर जी हा ये हैं क्रिकेट के भगवान का नाम। बल्लेबाजी के हर रिकार्ड उनके नाम है।
चाहे एकदिवसीय क्रिकेट मे 200 रन बनाना हो, या सबसे ज्यादा शतक लगाना हो।
1989 में डेब्यू करने वाले सचिन 23 साल से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल रहे हैं। बल्लेबाजी के तक़रीबन हर रिकार्ड उनके नाम हैं।
हाल ही में आस्ट्रेलिया की सरकार ने उन्हें " आर्डर ऑफ़ आस्ट्रेलिया " सम्मान देने का फैसला किया है।
" आर्डर ऑफ़ आस्ट्रेलिया " सम्मान 14 फरवरी 1975 को आस्ट्रेलिया की रानी "ऐलिजाबैथ-2" ने शुरू किया था।
आस्ट्रेलिया के नागरिको और बाकी लोगो को किसी श्रेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए और सेना के जवानो को भी जाबांज प्रदर्शन के लिए ये सम्मान दिया जाता है।
सचिन इस सम्मान को पाने वाले दुसरे भारतीय हैं। इससे पहले ये सम्मान भारत के पूर्व एटारनी जनरल "सोली सोराबजी" को दिया गया था। उन्हें मार्च 2006 में भारत और आस्ट्रेलिया के दिपक्षीय संबंधो के सुधार में अपनी सेवाए देने के लिए ये सम्मान दिया गया था।
इसके पहले सचिन को राज्यसभा सदस्य के लिए भी मनोनित किया था। जिसे उन्हें बड़ी ही शालीनता के साथ स्वीकार किया और एक राज्यसभा सदस्य को मिलने वाली सुविधाए लेने से इनकार करके अपनी महानता का परिचय दिया था।
जब सचिन को " आर्डर ऑफ़ आस्ट्रेलिया "देने की बात हुई तो आस्ट्रेलिया के पूर्व टेस्ट बल्लेबाज मैथ्यू हैडन ने इसकी आलोचना करते हुए कहा हैं" अगर सचिन आस्ट्रेलिया में होते तो उन्हें प्रधानमन्त्री बना दिया जाता,सचिन एक महान खिलाड़ी है। परन्तु ये सम्मान सिर्फ आस्ट्रेलिया के नागरिको को मिलना चाहिए।"
शायद हैडन अपने कहे उस वाक्य को भूल गए हैं। जो उन्होंने कुछ सालो पहले सचिन के लिए कहा था " मैंने भगवान् को देखा हैं, वो भारतीय क्रिकेट टीम के लिए नंबर चार पर बल्लेबाजी करते हैं।"
जब हैडन ने सचिन को भगवान् मान लिया हैं। तो फिर क्यों आपत्ति जता रहे है।
सचिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100 शतक लगा चुके हैं। पहले शतक से लेकर अब तक उनका खेल जरूर बदला हैं।परन्तु पहले शतक से लेकर सौवे शतक मे उनका जोश खेल के प्रति बढता ही गया है।
सचिन के 100 शतक मे सारे लाज़वाब है। पर जब भी कोई बल्लेबाज़ पहली बार टेस्ट क्रिकेट खेलता है। टेस्ट मे शतक बनाना उसका सपना होता हैं।
चलिए सचिन को इस सम्मान मिलने की ख़ुशी पर हम उनके पहले टेस्ट शतक पर एक नजर डाल लेते हैं।
सचिन ने अपना पहला शतक इंग्लैड के खिलाफ 1990 मे ओल्ड ट्रेफर्ड मे लगाया था। उन्होने अपने 9वे टेस्ट मे ही अपना पहला शतक जड दिया था। उस वक्त उनकी उम्र सिर्फ 17 साल 112 दिन थी
भारत की टीम इंग्लैड के दौरे पर थी। ये टेस्ट उस सीरिज का दुसरा टेस्ट मैच था। सचिन का ये पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के बाद तीसरा विदेशी दौरा था। इस दौरे के पहले मैच मे सचिन लार्ड्स के मैदान पर दोनो पारियो मे महज 10 और 27 रन ही बना पाये थे।
दुसरे टेस्ट मे इंग्लैड ने टास जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया और अपनी पहली पारी मे 519 रन बनाये. जिसमे कप्तान ग्रेम गूच, अथर्टन और स्मिथ के शतक शामिल थे।
जवाब मे भारत ने पहली पारी मे कप्तान अजहर के 179, मांजरेकर के 93 और सचिन के 68 रन की बदौलत 432 रन बनाये।
इंग्लैड ने दुसरी पारी मे 4 विकेट खोकर 320 रन बनाये और पारी घोषित कर दी।जिसमे एलन लैम्ब के शानदार 109 रन शामिल थे।
भारत के सामने आखरी दिन 408 रन बनाने का लक्ष्य था। जब सचिन क्रीज पर आये तो भारत के 4 विकेट महज 109 रन पर गिर गये थे। 127 रन पर जब अजहर आऊट हुये तो लगा के ये मैच बचाना आसान नही होगा। सचिन और कपिल ने सभंलकर खेलना शुरु किया और दोनो के बीच 56 रन की साझेदारी हुई, परंतु इस साझेदारी मे 57वा रन बन पाता उसके पहले ही हेमिंग्स ने कपिल के डंडे बिखेर दिये। भारत का स्कोर 183/6 पर हो गया था। उस वक्त खेल खत्म होने मे ढाई घंटे बाकी थे।
लग रहा था अब भारत ये मैच हार जायेगा। पर एक युवा खिलाडी ने कुछ और ही ठान रखा था। जब वो 10 रन पर थे तब हेमिंग्स ने अपनी ही गेंदबाजी पर उनका कैच छोड दिया था। सचिन ने शानदार शतक लगाया और उस कैच की कीमत इंग्लैड को बता दी थी। सचिन ने प्रभाकर के साथ 160 रन की अविजीत साझेदारी करके मैच बचाया। भारत ने अपनी दुसरी पारी मे 343/6 बनाये। उन्होने नाट आऊट 119 रन बनाये और सबसे कम उम्र मे टेस्ट मे शतक लगाने वाले बल्लेबाजो की सूची मे उनका नाम दुसरे स्थान पर जुड गया था। उनसे कम उम्र मे शतक मुश्ताक मोह्म्मद ने बनाया था। उस टेस्ट मे सचिन ने भारत के महान बल्लेबाज गवास्कर के पैड्स पहनकर बल्लेबाजी की थी।
चिराग जोशी
उज्जैन(म.प्र)
खेल सम्पादक, रफ़्तार लाइव
chiragrocks31@gmail.com
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वाकई में यह महान बल्लेबाज़ परिचय का मोहताज़ नही है ....
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