अब पल भर की खुशियाँ मनाना चाहते हैं

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थक गए हम जिन्दगी की राह पर चलते-चलते,
       अब पल भर की खुशियाँ मनाना चाहते हैं........

भटके बहुत हैं, इन पथरीली राहों पर चलकर,
अब हम अपनी मंजिल को पाना चाहते हैं........ 

जो मिला दे राह, मुझे आशियाने से मेरे, 
उस राह पर अब हम चल जाना चाहते हैं........... 

रौशनी सारे शहर में, मेरे घर में अँधेरा  है,
अब बनकर शम्मा, जल जाना चाहते हैं ..............

लगता है रूठा है, वो खुदा मेरी जिन्दगी से,
सर झुकाकर उसको, हम मानाना चाहते हैं.............

अब जिन्दगी में कुछ कर जाना चाहते हैं,
बिगड़ जाना या फिर संवर जाना चाहते हैं ................

थक गए हम जिन्दगी की राह पर चलते-चलते,
अब पल भर की खुशियाँ मनाना चाहते हैं .........

लेखक - स्वाति गुप्ता 
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