अल्फाज़

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प्यार नाम के अल्फाज़ की ज़िन्दगी के शब्दकोष में तलाश है...

दिल तक तेरे पहुँचने का रास्ता पूछता हर जज़्बात है...

देता हूँ दिलासा हर धड़कन को जिसमें बसा तेरा ही नाम है...

ढूंढता हूँ खो चुके अपने वजूद को जो तेरे अक्स की पहचान है...

हर सांस में बसी गुज़ारिश चाहती बनाना तुझे मेरा अरमान है...

वक्त बेवक्त ना जाने क्यूँ तेरा ख़्याल बन जाता हर लम्हात है...

ज़िन्दा तो हूँ तेरे बिन मगर लगता नहीं जी रहा कोई एहसास है...

बिखरी सी चाहत की दुनिया जिसमें कुछ बचा तो बस मेरे अल्फाज़ हैं....


लेखक - अंकुर सहाय 

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