
हिन्दी में एक कहावत है “अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई
खेत” यानि उस समय समस्या का समाधान करने से कोई फायदा
नहीं जब समस्या बहुत बड़ी बन चुकी हो.
कई
बार आग लगे तब कुंआ खोदने की आदत इंसान के लिए बड़ी घातक सिद्ध होती है जैसे एड्स (AIDS) के केस में.
एड्स (AIDS) एक ऐसी बीमारी जो
इंसान को जीते-जी मरने पर विवश कर देती है. आज एड्स (AIDS) दुनियाभर में सबसे घातक बीमारी के रूप
में उभरकर सामने आया है. यह एक ऐसी
बीमारी
है जिसका कोई इलाज नहीं है लेकिन ऐसा भी नहीं है कि इस बीमारी से बचा ही नही जा सकता. इस बीमारी का
एकमात्र इलाज है बचाव.
सावधान हटी दुर्घटना
घटी
“सावधानी हटी दुर्घटना
घटी” यह शब्द एड्स (AIDS) की बीमारी के लिए बिलकुल प्रयुक्त साबित
होते हैं. आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और अनैतिक
संबंधों की बाढ़ में यह बीमारी और भी तेजी से फैल रही है. सिर्फ असुरक्षित यौन संबंधों से ही नहीं
यह बीमारी संक्रमित खून या संक्रमित इंजेक्शन की
वजह से भी फैलता है. आज यह बीमारी पूरे विश्व के लिए एक सरदर्द बन चुकी है और यही वजह है कि
संयुक्त राष्ट्र भी इस बीमारी को बेहद गंभीरता से लेता
है और हर साल 01 दिसंबर को विश्व एड्स
दिवस के रूप में मनाता है.
प्रतिवर्ष 01 दिंसबर को विश्व एड्स
दिवस (World AIDS Day) के रूप में मनाया जाता है. विश्व एड्स
दिवस (World AIDS Day) की शुरूआत 1 दिसंबर 1988 को
हुई थी जिसका मकसद, एचआईवी एड्स से
ग्रसित लोगों की मदद करने के
लिए धन जुटाना, लोगों में एड्स को
रोकने के लिए जागरूकता फैलाना और
एड्स से जुड़े मिथ को दूर करते हुए लोगों को शिक्षित करना था.
1988 से हर साल एक दिसंबर
को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है. इस दिन लोगों को एड्स के
लक्षण, इससे बचाव, उपचार, कारण इत्यादि के बारे में जानकारी दी जाती है
और कई अभियान चलाए जाते हैं जिससे इस महामारी को जड़ से
खत्म करने के प्रयास किए जा सकें.
World
AIDS Day 2012 Theme: विश्व एड्स दिवस 2012 की थीम
इस वर्ष विश्व एड्स दिवस (World AIDS Day) की
थीम है ‘गैटिंग टू जीरों’ (“Getting to Zero”). ‘गैटिंग टू जीरों’ (“Getting to Zero”) का उद्देश्य है कि
कोई भी एचआईवी एड्स से नया व्यक्ति
ना
तो पीडि़त हो और ना ही एड्स के कारण किसी की मृत्यु हो. यानी एचआईवी संक्रमण की दर को रोकते हुए शून्य स्तर
तक लाना.
एड्स
आज एड्स के प्रति अच्छी खासी
जागरुकता फैल चुकी है और अधिकतर लोग जान चुके हैं कि यह क्या है और कैसे होता है? 1980 के दशक के शुरुआत में इस बीमारी के
सामने आने के बाद से अब तक
दुनियाभर में लाखों की तादाद में लोग इस बीमारी से जान गंवा चुके हैं.यूएनएड्स के मुताबिक, कि अब तक 34 मिलियन लोग एड्स से ग्रसित हैं और 2010 तक 2.7
मिलियन
लोग इस इंफेक्शन के संपर्क में आए हैं, जिसमें से 3 लाख 90 हजार
बच्चे भी इसकी चपेट में आएं. इतना ही नहीं पिछले पांच सालों में यानी 2010 तक एड्स से ग्रसित लगभग 1.8 मिलियन लोगों की मौत हो चुकी है.
What
is AIDS: एड्स क्या है?
एड्स का पूरा नाम
‘एक्वायर्ड इम्यूनो
डेफिसिएंशी सिंड्रोम’ है और यह बीमारी एच.आई.वी. वायरस से
होती है. यह वायरस मनुष्य की प्रतिरोधी क्षमता को
कमज़ोर कर देता है. एड्स एच.आई.वी. पाजी़टिव गर्भवती महिला से उसके बच्चे को, असुरक्षित यौन संबंध से या संक्रमित
रक्त या संक्रमित सूई के
प्रयोग से हो सकता है.
Causes
of AIDS: एड्स फैलने के कारण
एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित संभोग करना इस मर्ज के प्रसार का एक प्रमुख
कारण है. ऐसे संबंध समलैंगिक भी हो सकते हैं. अन्य कारण हैं:
* Blood
Transfusion: ब्लड-ट्रांसफ्यूजन के दौरान शरीर में एच.आई.वी. संक्रमित रक्त
के चढ़ाए जाने पर.
* Infected
Injection: एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति पर इस्तेमाल की गई इंजेक्शन की सुई का
इस्तेमाल करने से.
* एचआईवी पॉजिटिव महिला
की गर्भावस्था या प्रसव के दौरान या फिर स्तनपान कराने से भी नवजात शिशु को यह
मर्ज हो सकता है.
* इसके अलावा रक्त या शरीर के अन्य द्रव्यों
जैसे वीर्य के एक दूसरे में मिल जाने
से.
दूसरे लोगों के ब्लेड, उस्तरा और टूथ ब्रश
का इस्तेमाल करने से भी एचआईवी का खतरा रहता
है.
एड्स के लक्षण
एड्स होने पर मरीज का वजन अचानक
कम होने लगता है और लंबे समय तक बुखार हो सकता है. काफी समय तक डायरिया बना रह सकता है.
शरीर में गिल्टियों का बढ़ जाना व जीभ
पर
भी काफी जख्म आदि हो सकते हैं.
एड्स संबंधित जांचें
* एलीसा टेस्ट
* वेस्टर्न ब्लॉट टेस्ट
* एचआईवी पी-24 ऐंटीजेन (पी.सी.आर.)
* सीडी-4 काउंट
एड्स का उपचार
* एचआईवी संक्रमित
लोगों के लिए आशावान होना अत्यंत महत्वपूर्ण है. ऐसे भी लोग
हैं जो एचआईवी/एड्स से पीड़ित होने के बावजूद पिछले 10 सालों से जी रहे हैं. अपने डॉक्टरों के
निर्देशों पर पूरा अमल करें. दवाओं
को सही तरीके से लेते रहना और एक स्वस्थ जीवनचर्या बनाये रखने से आप इस रोग को नियंत्रित
कर सकते हैं.
* एच.ए.ए.आर.टी. (हाइली
एक्टिव ऐंटी रेट्रो वायरस थेरैपी) एड्स सेंटर पर नि:शुल्क उपलब्ध है. यह एक नया
साधारण व सुरक्षित उपचार है.
एड्स को लेकर भ्रम
कई लोग सोचते हैं कि एड्स
रोगी के साथ उठने बैठने से यह रोग फैलता है तो यह गलत है. यह बीमारी छुआछूत की नहीं है. इस
बीमारी को लेकर समाज में कई भ्रम हैं
जिन्हें
दूर करना बहुत जरूरी है. जैसे:
एड्स इन सब कारणों से
नहीं फैलता:
* घर या ऑफिस में
साथ-साथ रहने से.
* हाथ मिलाने से.
* कमोड, फोन या किसी के कपड़े से.
* मच्छर के काटने से.
लेख : अजय शुक्ला