शर्मा जी बोले - "अरे नहीं गुप्ता जी, आजकल नामी गिरामी लोगों का कौन सा काम रह गया है। उनका तो अब केवल नाम रह गया है। सब इंतजाम हो जाएगा बल्कि ये सोचिये कि बस हो ही गया।"
रिफाइंड तेल के कनस्तर मंगवा लिए हैं और देसी घी की इत्र की शीशियाँ। खुशबू के साथ-साथ स्वाद भी एकदम देसी घी जैसा लाती है। रही मिठाइयों की बात तो शहर के नामी हलवाई के यहाँ से खाली डिब्बे मंगवा लिए हैं और नुक्कड़ के हलवाई के यहाँ से मिठाई लाकर भरवा देंगे डिब्बों में।
गुप्ता जी - " अरे ! शर्मा जी लड़के वालों को कुछ पता चल गया तो .........?"
शर्मा जी -" अरे नहीं गुप्ता जी। जब सावित्री बिटिया दिखी थी तब उसी के मिस्ठान भण्डार की मिठाई खिलाई थी। लड़के वाले खासी तारीफ़ कर रहे थे। बस चाट पकोड़े पकवान आइसक्रीम सबका वही हाल है। बैनर नामी रखेंगे और आदमी अपने। शादी के तोहफों में फिरोजाबाद के एक मित्र से हमने डिनर सेट मंगवा लिए हैं हलका defected माल है किसी की समझ ने न आएगा। और लोग तारीफ़ भी करेंगे।"
गुप्ता जी-" अरे वाह ! गुप्ता जी ,शादी में भी भ्रष्टाचार ?"
शर्मा जी -" आखिर सीखा भी तो अपनी ही सरकार से है। क्या होगा हमारी बेटियों का जब महगाई आसमान छुएगी? क्या हमारी बेटियों को महगाई की मार चढ़ा दें? हमें भी सोनिया का ही रास्ता अपनाना होगा,और वादा करके उसे न निभाना होगा।"
मैं वही खड़ी सब सुन रही थी और मन में ही बोली " वाह मनमोहन तेरी माया जैसा तू वैसी ही प्रजा को पाया "
By- swati gupta
