इस लेख को मैंने कही
से देख कर लिखा है इस जगह पर क्यों की ये एक ऐसी घटना है जिसे ज्यादा से ज्यादा
लोगो तक पहुचाना जरुरी है, और लोगो को इसके प्रति जागरूक करना फ़र्ज़ भी है हमारा.
अपने समाज में तमाम विकास के बावजूद अभी
भी प्रेम विवाह करना खतरों से खाली नहीं। प्रेम करने वाले जोड़े कई
बार दहशत में जीते हैं और कोई उनके साथ नहीं आता। अपना दर्द बयां करते हुए
प्रेम विवाह करने वाले यूपी के दंपति ने बताया कि गांववालों ने उन्हें
देखते ही जान से मारने की धमकी दी है। नव विवाहित दंपति ने कहा कि गांव
वाले लगातार उनकी तलाश कर रहे हैं और उन्हें जान से मारने की कोशिश में हैं।
ये यूपी के मेरठ जिले के खरखौदा गांव का रहने वाला दंपति आज सभी से
छुपते-छुपाते दर-दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर हैं। इनका कसूर बस इतना ही है
कि इन्होंने प्रेम विवाह किया है। आए दिन हो रही झूठी शान के लिए होती
हत्याओं को देखकर हैरानी होती है कि हमारे देश में ऐसे लोग भी हैं, जिनकी अपनी दुनिया और अपने बनाए नियम
कानून हैं।
जो लोग उनके फरमानों का पालन नहीं करते उन्हें या तो गांव से निकाल दिया जाता है या मौ त
के घाट उतार दिया जाता है। ऐसे ही फरमान के भुक्तभोगी है यह युगल सचिन त्यागी और उनकी पत्नी
पूजा त्यागी। ये दोनों 10 जनवरी,
2012 को शादी के पवित्र
बंधन में बंध गए। इनके विवाह का पंजीकरण विवाह निबंधक गाजियाबाद के वहां हुआ था।
घरवालों ने की मारपीट जैसे ही पूजा के परिवार
वालों को इस बात का पता चला, वे
सचिन के घर पहुंच गए। वहां तोड़फोड़ की और सचिन के
परिवारवालों को मारपीट कर घर से निकाल दिया। पूजा के परिवार में इस विवाह का विरोध
करने वालों में उनके पिता राधेश्याम, भाई व चचेरे भाई हैं। यही नहीं, पूजा के घरवालों ने सचिन की जान लेने की नियत से अवैध
हथियारों और बंदूकों से उसके घर पर फायरिंग भी की। सचिन के परिवारवालों ने इसकी शिकायत पुलिस में
की लेकिन उन्होंने रिपोर्ट दर्ज करने से मना कर दिया। छह महीने से सचिन व
उसके घरवाले घर से बाहर रह रहे हैं क्योंकि उन्हें गांव न घुसने की धमकी
मिली हुई है। इन मामले को प्रशासन बेहतरी से जानता है लेकिन कोई भी
कार्रवाई करने से बचता है। प्रेम करने वाली लड़कियों को इज्जत के नाम पर
परिवार की प्रताड़ना से हमेशा जूझना पड़ता है। खासकर ग्रामीण इलाकों में
परिवार के मर्द सदस्य इसे अपनी बेइज्जती बता कर मार-कूट पर उतारू हो
जाते हैं। प्रेमी युगल के खिलाफ पारिवारिक रंजिशें पाल ली जाती हैं और
परिवार एकदू सरे के खून के प्यासे हो जाते हैं।
कोर्ट से मांगी सुरक्षा इलाहाबाद
हाईकोर्ट में इन्होंने
याचिका दायर की थी, जिसमें
प्रशासन से सुरक्षा मुहैया कराने की बात कही गई थी लेकिन इस पर भी कोई
कार्रवाई नहीं हुई। कोर्ट की ओर से जारी सुरक्षा का आदेश लेकर जब सचिन अपने गांव
खरखौदा वापस गया तो वहां पुलिस प्रशासन ने यह कहकर खिल्ली उड़ाई कि
आपकी समस्या तभी सुलझ सकती है, जब
आपकी हत्या
हो जाए। पुलिस वर्दीधारियों के मुंह से यह कहा जाना काफी शर्मनाक है, जबकि अभी प्रदेश के एक अन्य दंपति का
ऐसा ही मामला चर्चा में है और सरकार की ओर से उनकी सुरक्षा के कदम
उठाये जाने की बात हुई है। सचिन जब वापस पुलिस सुरक्षा पाने
के लिए गांव में पहुंचा तो पूजा के
परिवार वालों ने
फिर उनके साथ मारपीट की और उनकी फसलों को आग लगा दी। पीड़ित दंपति चाहता है कि पुलिस उन्हें
सुरक्षा मुहैया कराए और वे अपने गांव में सकुशल लौटकर चैन से रहें। यह अकेले सचिन और पूजा की
कहानी नहीं है, ऐसी
कई घटनाएं हैं, जो
मीडिया में आ भी नहीं पाती, जिनको
मार दिया जाता है या भयभीत करके रखा जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि सबकुछ
जानते हुए भी सरकार और प्रशासन आखिर कब तक चुपचाप आंख मूंदें झूठी शान
के नाम पर होते इस खूनी खेल को देखते रहेंगे। आखिर कब तक गांव की
पंचायतें ऐसे नौजवानों की बलि चढ़ाती रहेंगी। यह भी सच है कि यह सिर्फ कानूनी
मामला नहीं है, सामाजिक
परिवर्तन और
विकसित सोच द्वारा भी इस तरह के मामले सुलझ सकते हैं, लेकिन सवाल यह भी है कि पहल कौन करे।
अजय शुक्ला (रफ़्तार लाइव)
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