दरिंदों से ज्यादा दुख दे रहे हैं नेता और संत के बयान

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बहादुर लड़की दामिनी हम सब को छोड़ कर जा चुकी है मगर उस बहादुर लड़की के नाम पर राजनीति और घटिया बयानबाजी बंद होने का नाम नहीं ले रही है जहां संघ के एक नेते ने इस मूद्दे पर “भारत और इंडिया” का फर्क बताया था, बी जे पी के एक नेता कैलाश विजयवर्गीय ने ये बयान दिया कि औरतें अगर अपनी लक्ष्मण रेखा से बाहर कदम रहेंगी तो रावण उनके साथ दुष्कर्म करने को तैयार बैठा है, वही राम माधव को विवाह को एक कांट्रेक्ट बता कर विवाह की गरिमा पर ही प्रश्नचिन्ह लगा दिया | इन सब बयानबाजियों के बाद संत आशाराम ने तो हर हद को ही पार कर दिया, उनके मुह से ऐसा बेतुका ज्ञान निकला जिसने पीड़िता को भी इस अपराध का सामान दोषी ठहरा दिया |
आशाराम ने कहा की “अगर उस लड़की ने दीक्षा ली होती तो ऐसा नहीं होता, उन अपराधियो के आगे गिद्गिदायी होती और उनको अपना भाई बनाती तो उसके साथ ये दुराचार नहीं होता और ताली एक हाथ से नहीं बजती” | क्या आशाराम को ये नहीं पता की एक अपराधी ने दामिनी को बहन कह कर ही बस में बुलाया था आशाराम के इस बयान को सुनकर तो यही लगता है की परिस्थितियां उहने दिखाई नहीं देती या फिर वो उन्हें देखना ही नहीं चाहते है |
संत वह एक इंसान होता है जो समाज को बुरे से अच्छे की ओर अपने सुज्ञान के द्वारा ले जाता है मगर आशाराम के बयान को सुनकर तो लगता है की सर्वप्रथम तो उन्हें ही किसी ऐसे गुरु की आवशकता  है की जो उनके विचारों को सुधार कर अच्छे और बुरे का फर्क बता सके, ताकि अपनी शरण में आये हुए लोगो को तो वो कम से कम ऐसा ज्ञान दे सके जिससे अगर उकना कुछ भला न हो तो कम से कम उनका कुछ बुरा भी न हो |
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