दोहरे संकट के दौर से गुजरता भारत ,क्या तैयार है सरकार और हम ?

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हाल ही देश में जिस तरह के हालात बन रहें हैं वो बहुत ही चिंताजनक हैं क्यूंकि देश इस समय उन परिस्तिथियों से गुजर रहा है जो इसे समय-समय पर बाहरी और अंदरूनी तौर पर झकझोर रही हैं और साथ ही कहीं न कहीं कमजोर भी बना रही हैं, देश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध, जनता का पुलिस पर से लगातार उठता भरोसा और अकबरुद्दीन ओवैसी जैसे लोगो की सांप्रदायिक सद्भावना को भंग करने की कोशिश आदि जैसी कुछ बातें कुछ ऐसा माहौल बना रही हैं जोकि देश के लिये एक बड़े खतरे का काम कर सकते हैं |

उधर झारखंड के लातेहार में नक्सलियों ने सोमवार को हमला कर अपना अब तक का सबसे भयावह और निर्दयी रूप दिखाया, सोमवार शाम को नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में 11 जवान शहीद हुए थे। मुठभेड़ के बाद शहीद जवानों के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए सरकारी अस्पताल लाया गया था जहां पोस्टमॉर्टम में पता चला नक्सलियों ने एक जवान के शव को चीरकर उसमें बम फिट कर दिया था बम की सुचना मिलते ही बम निरोधक दस्‍ते को मौके पर बुलाया गयाजिसने बम को निष्क्रिय कर दिया, इससे पहले नक्सलियों ने एक सैनिक को पेड़ से बाँध कर उसकी आँखे निकाल ली थी फिर उसके शारीर के हिस्से काटे थे, नक्सलियों द्वारा किया गया ये बर्बरतापूर्ण व्यहवार अतिचिंताजनक है क्यूंकि आज से पहले नक्सलियों इस तरह की निर्दयिता नहीं दिखाई थी |

वहीँ पाकिस्तानी सैनिकों ने मंगलवार आठ जनवरी को करगिल जैसी दरिंदगी दोहराई। इस दुस्साहसिक घटना में दो जवान घायल भी हुए हैं। मारे गए जवानों के नाम लांस नायक हेमराज और सुधाकर सिंह हैं। गौरतलब है कि 1999 में करगिल युद्ध के शुरुआत में पाकिस्तानी सैनिकों ने कुछ इसी तरह की दरिंदगी दिखाते हुए गश्त के लिए गए कैप्टन सौरभ कालिया और उनके पांच साथियों की बेरहमी से हत्या कर दी थी। उनके क्षत-विक्षत शव बाद में भारत को सौंपे गए थे। कैप्टन कालिया के पिता अभी तक इंसाफ के लिए लड़ रहे हैं। गौरतलब है कि पिछले एक महीने में दर्जनों बार पाक सेना ने सीजफायर का उल्लंघन किया है|


अंततःसोचनीय बात तो ये है ये हालात हमारे देश के प्रतिकूल नहीं हैं और खासकर तब जब हमारा सबसे बड़ा दुश्मन देश हम पर किसी भी तरह आघात करने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहता है, तो क्या हमारी सरकार और सेना ऐसी स्तिथियो के लिये तैयार है अगर हमारा देश दोहरे संकट में पड़े तो क्या हमारी सरकार उस संकट से निपटने के लिये तैयार है, और बात सिर्फ सरकार के तैयार रहने से भी पूरी नहीं हो जायेगी बल्कि हमें भी समझना होगा की ये समय एक जुट होकर अपने आपसी मतभेद भुलाकर उन लोगो को करारा जवाब देने का है जो हमें तोड़ना चाहते हैं, क्यूंकि सुराख तो हर घर में होते हैं पर बाहर के सापों को उनका पता नहीं चलना चाहिए |

"रफ़्तारलाइव ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से जवाब माँगा है और हमें उनके जवाब का बेसब्री से 
इंतज़ार है , आशा है प्रधानमंत्री  विषय की गंभीरता को समझते हुए जल्द से जल्द कोई उचित करवाई अवश्य करेंगे "
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