एक बेहतर शिक्षा की नीव रखेंगे

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ज के पूंजीवाद के युग में लोग आर्थिक रूप मजबूत होने के लिए ना जाने कितने तरह के हत्थकंडे अपनाते हैं , पर वास्तविकता में जो तरीके अख्तियार किये जा रहे ,उनसे हो रहे नुकसान के बारे किसी ने सोचा है या उसपर किसी का ध्यान गया है मैं बात करने जा रहा हूँ ऐसे पूंजीपति शिक्षा माफियों की जो अपने प्रशिक्षण संस्थान को चालने के लिए ना जाने तरह –तरह की चका-चौंध से भरे गैलमर, झूठ और फरेब से भरे वादों का वादा कर आपको मोटी रकम भर एडमिशन करने के लिए मजबूर करते हैं ,एडमिशन के दौरान किये गए वादों का दावा ढकोसला तब सिद्ध होता है जब उनके द्वारा किया गया १०० प्रतिशत प्लेसमेंट का दावा बेबुनियाद साबित होता है और आपके द्वारा खर्च किये लाखो रूपए का कोई मतलब नही निकलता,आप जॉब के लिए ऑफिस से ऑफिस के चक्कर काटते थक जाते है या जुगाड़ पानी होने पर कहीं फिट हो जाते हैं और अपने ऊपर हुए मानसिक प्रहार का जवाब ना देते हुए , किस्मत को दोषी मढ़ते हुए उन पूंजीपतियों के खिलाफ कदम उठाने की जहमत नही करते जो विधार्थीयों को आर्थिक और मानसिक रूप क्षति    पहुचाते हैं ,इनके खिलाफ शिक्षा मंत्रलाय द्वारा कोई ठोस कदम या फिर गाइडलाइंस भी जारी नही जाती जिससे उनकी रुपरेखा में पारदर्शिता आ सके |
एक बड़े पैमाने में शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव की जरूरत है , क्योंकि सरकारी शिक्षा का गिरता स्तर लोगों को प्राइवेट कालेज की ओर मुख करने पर विवश करता है, प्राइवेट कालेज का रुख धनाढ्य लोग ही करते है और आर्थिक दशा से कमजोर लोग सरकार के बनाए हुए गैर जिम्मेदार शिक्षा के ढाचे का शिकार होते हैं इस समय सरकारी शिक्षा की जो फहजीयत हुयी वह काफी सोचनीय है एक ओर जहाँ प्राइवेट कालेज शिक्षा देने के एवज में मन –माने ढंग से वसूली करते हैं और अपने ही नियमो को बकायदे थोपते हैं| अब शिक्षा के क्षेत्र में बढता संकट एक नए बदलाव को निमन्त्रण दे रहा और वो दिन दूर नही जब लोग इसके विरोध के लिए सड़क पर उतरेंगे और एक बेहतर शिक्षा की नीव रखेंगे |
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