दक्षिण कोरिया की अदालत ने बाल शोषण के मामले में दोषी को १५ साल की कैद और इसी दौरान उस अपराधी को दवाओ के जरिये नपुंसक बना देने कि सजा सुनाई है किसी एशियाई देश में ये
पहली तरह कि सजा कि कोशिश है , जो कि एक अच्छे उदाहरण के रूप में पूरी दुनिया के सामने प्रस्तुत हुई है |
समाज में कई लोग हैं जो रेप जैसा कुकृत्य करने वालो के लिये सिर्फ फांसी कि सजा को काफी नहीं समझते हैं उनके मुताबिक शायद ये फैसला एक सही दिशा में शुरुवात कि तरह होगी जो आगे चलकर दोषियों के लिये उदारण बनेगी और साथ ही दूसरे देशो जैसे भारत के लिये सीख जो कि सारे सुबूत आँखों के सामने होने के बाद भी सजा को न जाने किस तराजू में तौल कर देख रही है |
बात सिर्फ इतनी सी नहीं कि दोषियों को उनके किये कि सजा फांसी के रूप में मिल जाये और किस्सा खत्म, इस वक्त जरुरत ऐसा कानून बनाने कि जो दोषियों को ऐसी सजा दिलवाए जो कि आने वाले समय में बाकी अपराधियों के लिये डर की वजह बने | सरकार को चाहिए कि वो सजा में बर्बरता को न तलाशे बल्कि ये देखे कि वो एक सजा कितनी ज़िंदगिया बचा सकती है |
