सफ़र जिंदगी का महसूस करता हूँ
कोई साथ तब ना था, जब मैं आया था
चलते रहने मैं मेरा अक्स खोजता हूँ
इस जिंदगी में मेरा ‘मैं’ ढूँढलू
प्यार की उलझनों में कहीं ‘खो’ ना जाए डरता हूँ
मैं अकेला ही सही पर चलता हूँ
सारे रिश्ते निभाके देख लिए
सारे बंधन छुड़ाके देख लिए
रुक गया था कुछ देर के लिए
अब अकेले ही अपने ‘आप’ समेटा हूँ
मैं अकेला ही सही पर चलता हूँ
तस्वीर की तरह आई थी वो
ख़ूबसूरत सपना दिखने
मैंने उससे मोहब्बत कर ली
अब अपनी ही गलती को कोसता हूँ|
मैं आकेला ही सही पर चलता हूँ
साभार -Aackruti Nagpal (Actress Model)
