पहचानिए जरा किसकी बात हो रही है। अजी बात हो रही है उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय अखिलेश यादव जी की। महोदय जी ने 2013-2014 का बजट पेश क्या किया जनता जनार्दन के तो होश उड़ गए है। जनता चकराई हुई है। वो बात जरा ये है जबसे महोदय मुख्यमंत्री बने है तबसे इतने वादे इतने वादे कि बस पूछो मत ... पर अब चकराना तो लाजमी है आखिर ये वादे पूरे भी तो होते दिखे कहीं।
बजट के कुछ पहलुओं पर नजर फिरा ही ली जाए। प्रस्तावित बजट में किसानो पर उपकार ये किया गया है कि उन्हें शायद अब कर्ज सस्ता मिलने लगेगा। बेचारा किसान कर्ज लेकर जिन्दगी भर उसी कर्ज के बोझ में मर भी जाएगा क्योंकि बजट में अनाज भंडारण की कोई व्यवस्था नहीं की गई है और मंदी सुधारने की कोई भी नीति नहीं दिखी तो अब बेचारे किसान का भला कैसे होगा ? अखिलेश जी अगर वृद्ध किसानो की पेंशन पर थोडा सा भी ख्याल कर लेते तो शायद अच्छा रहता।
बजट में बेरोजगारी भत्ते पर भी चर्चा की है अखिलेश जी ने। पर शायद उन्हें ये कोई बता पाता कि लोगो को रोजगार चाहिए कोई बेरोजगारी भत्ता नहीं। प्रदेश में लगभग 72,825 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पर पिछले दो साल से राजनीति चल रही है पहले बसपा सरकार अब सपा सरकार। इस भर्ती प्रक्रिया के नाम पर करोड़ों रुपया सरकार अन्दर कर चुकी है उम्मीदवार लगातार परेशान हैं। पर सरकार इस बात पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। सरकार अगर बेरोजगारी भत्ता बाटने के बजाये बेरोजगारी की समस्याओं के निवारण पर ध्यान दे तो शायद सच में मेरा उत्तर प्रदेश एक उत्तम प्रदेश बन जाए।
बजट में थोड़ी कृपा गंगा माँ के ऊपर भी दिखाई गई है रिवर फ्रंट डेवलप्मेंट योजना और सिवरेज के लिए 70 करोड़ रुपये खर्च होगे। अब ये तो सभी जानते है कि आज तक करोडो रुपया गंगा माँ के ऊपर खर्च हो चुका है और गंगा माँ और मैली ही हुई हैं। कही ऐसा न हो फिर से जनता का 70 करोड़ रुपया गंगा माँ की धारा में प्रवाहित कर दिया जाए और गंगा माँ रोती ही रह जाए।
अब गंगा माँ रोए या न रोए उनकी संताने यानी कि उत्तरप्रदेश के वासी अपनी किस्मत पर रोते ही नजर आने वाले हैं क्योंकि वादे तो अनेक है पर पूरे होने में जरा खेद है। हाँ ये सोच के दिल को दिलासा दिया जा सकता है कि मंत्रियों का तो काम ही है वादे करके मुकर जाने का।
Written By- Swati Gupta
