मेरा उत्तर प्रदेश बने उत्तम प्रदेश का स्लोगन सुनने में भले ही अच्छा लगता हो लेकिन असल सच्चाई यही है कि यह प्रदेश अब अपराधों का प्रदेश बन चुका है। प्रदेश की क़ानून व्यवस्था की धच्चियां उड़ चुकी है। चोरी, डकैती, बलात्कार, दंगे जैसी घटनाएं तो इतनी आम हो चुकी हैं कि हर सुबह के अखबार में रोज की ही तरह आने वाली खबरे तो जैसे रट सी गई हैं। अपराध का वो ऊँचा सा लठ्ठा गड़ा है कि उखाड़ने की बात तो दूर सोचिये, इसे देखने के लिए ही आपकी गर्दन को खासी मशक्कत करनी पड़ेगी। सोमवार को जिला मुख्यालय पर आयोजित बसपा की मंडलीय बैठक में जब नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने पत्रकारों से समाजवादी की बदली हुई परिभाषा को बताया तो दिल बड़ा ही गदगद हो गया कि अब तो जो जितना बड़ा अपराधी है वो उतना ही बड़ा समाजवादी है। ये भले ही राजनीति की दुनिया में पार्टियों के एक दूसरे पर कसे हुए व्यंग क्यों न हो पर बात तो एक दम सटीक कही है भई। सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल में भले ही किये गए काम से जादा बड़ी लिस्ट किये गए वादों की हो पर उससे भी बड़ी लिस्ट अपराधिक घटनाओं की है। आंकड़ो की माने तो प्रदेश में छोटे बड़े कुल मिलाकर २३ साम्प्रदायिक दंगे हो चुके हैं। घरों में पहुँचने वाला अखबार बलात्कार, चोरी, डकैती की ख़बरों से पटा रहता है। प्रदेश के प्रतापगढ़ के सीओ की हत्या, पास के गाँव में १६ मुस्लिम परिवार के घरों को जलाये जाने की घटना, रौनापुर में थाने में थानाध्यक्ष की पिटाई की घटना, ये साबित कर देती है कि उत्तर प्रदेश सरकार में जब थाने में बैठा कार्यकर्ता सुरक्षित नहीं तो भला आम आदमी की क्या औकात ? भई हम तो राम भरोसे निकलते हैं घर से।
रफ़्तार लाइव
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