आखिर कसूरवार कौन ?

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देश के हालात बहुत खराब है। सोचना जरा लाज़मी है कि आखिर कसूरवार कौन ? कर्तव्यपालन का ठीकरा आखिर हम कब तक दूसरों के सर फोड़ते रहेंगे और खुद के कर्तव्यों से उन्मुक्त रहेंगे ? कोई कहता है देश का राजा खराब है कोई कहता है देश की व्यवस्था खराब है। कोई अपनी जिम्मेदारी क्यों नहीं लेता?
हर कोई अपने कर्तव्यों से उन्मुक्त होकर तमाशा देखना चाहता है केवल। आखिर हम हैं क्या?
एक ऐसी गहरी नींद की जनता है जिसे जगाने के लिए अन्ना जैसे नागरिक को आना पड़ता है। जब तक वो झकझोरता है तब तक हम अपने लिए लड़ते हैं पर जैसे ही वह शांत होता है हम भी चिर निंद्रा ले लेते हैं।
महिलाओं की स्थिति हमें तब समझ आती है जब कोई दामिनी सामने आती है। हमारी अंतरआत्मा अचानक चेतती है और हम हजारों मोमबत्तिया लेकर खड़े हो जाते है। और मोमबत्तियां खत्म होने के साथ की हमारी आँखों के सामने फिर से वही अँधेरा छा जाता है।
पुलिस और उनकी आदर्श पुलिस व्यवस्था हमें केवल उन ३ घंटों तक समझ आती है जब तक हमारे सोफे के सामने रखे टेलीवीज़न पर सिंघम जैसी कोई फिल्म चल रही होती है। और ३ घंटे के बाद हम फिर रास्तों पर छोटे-छोटे काम निकलवाने के लिए शौक से २० से १०० की पत्तियां इनके हाथों में थमाते नजर आते हैं और ये लेते हैं। ये लेते नहीं है जनाब हम देते हैं और फिर इन्ही को दोष भी देते हैं। जबकि गुनेहगार हम हैं। क्योंकि ये लेते हैं क्योंकि हम देते हैं।
नेता जी के भाषण और सुधार सम्बन्धी वादे मंच पर चलते रहते हैं और हम ताली बजाते रहते हैं और आकर सो जाते हैं। सरकार के ५ साल पूरे हो जाते है पर एक भी वादा पूरा होता नहीं दिखाई देता। जानते है क्यों ....? क्योंकि इन्हें सुनाना अच्छा लगता है और हमें सुनना अच्छा लगता है। सरकार जवाब नहीं देती क्योंकि देश की 1,241,491,960 करोड़ जनता सवाल नहीं करती।
हमारे समाज की कुरीतियाँ, कुप्रथाएँ, दोष, समस्याएँ हमें केवल तब और तब तक दिखाई देती हैं जब तक सत्यमेव जयते जैसे कार्यक्रम हमारे आँखों के सामने चलते हैं और फिर लम्बे समय तक ये सारे मुद्दे हमारे आँखों के सामने पड़े रहते हैं और हम अंधे बनकर खड़े रहते हैं। इन साड़ी बातों के बावजूद हम कर्तव्यपालन का ठीकरा दूसरों के सर फोड़ते रहते हैं।
देश जितना दूसरों का है उतना ही हर एक नागरिक का भी है  हम हमेशा आँख वाले अंधे बने रहे तो कभी समझ नहीं पायेंगे कि आखिर कसूरवार कौन ?
जय हिन्द।
जय भारत।
Written By- Swati Gupta
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