कश्मीर के आंतरिक हिस्सों में सेना क्यों ?

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सेना की भूमिका देश की सीमाओं पर है। किसी भी प्रदेश के अंदरूनी हिस्से में सेना की तैनाती अत्यंत आकस्मिक स्थितियों में छोटी अवधि के लिए ही की जा सकती है। कश्मीर के अंदरूनी हिस्सों से सेना को हटाने की जो मांग लंबे समय से उठती रही है, वह बहुत हद तक वाज़िब है - लेकिन इस मुद्दे पर जनमत-संग्रह की मांग से एक गलत परंपरा की नींव पड़ेगी और देश की बुनियाद कमज़ोर होगी। कश्मीर में जो खतरनाक स्थितियां बनी हैं उसके लिए ज़िम्मेदार वहां के आम नागरिक नहीं, हर साल पाक-अधिकृत कश्मीर से घुसपैठ करने वाले सैकड़ों आतंकी हैं। घुसपैठियों की कारगर रोकथाम के लिए सेना की तमाम ताक़त सीमा की निगरानी पर ही लगनी चाहिए। जैसा अन्य राज्यों में होता है, कश्मीर की आंतरिक सुरक्षा धीरे-धीरे और किश्तों में वहां की पुलिस को सौंप दी जानी चाहिये। उनकी मदद के लिए सेना की जगह अर्द्ध्दैनिक बलों की टुकड़ियां सुरक्षित तौर पर आबादी से यथासंभव अलग रखी जाए। कश्मीर के अंदरूनी भागों में सेना की लंबी अवधि से तैनाती के दुष्परिणाम अक्सर सैनिकों द्वारा नकली मुठभेड़ों और स्त्रियों के साथ दुराचार की शिकायतों के रूप में लगातार सामने आते रहे हैं। कश्मीरियों के साथ देश के दूसरे प्रदेशों के नागरिकों से अलग व्यवहार क्यों किया जा रहा है ? क्यों कश्मीरी युवाओं को देश भर में संदेह की नज़रों से देखा जाता है और उन्हें अपमानित किया जाता है ? क्या आप मानकर चल रहे हैं कि कश्मीर के तमाम लोग भारत-द्रोही हैं और इसलिए उनके साथ यही सलूक होना चाहिए ? अगर हां, तो ऐसी मानसिकता के साथ कबतक आप कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाए रख सकेंगे ? कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है तो अपने प्यार, भरोसे और सम्मान से वहां के नागरिकों का दिल जीतिए ! आतंरिक सुरक्षा के नाम पर आप लाखों लोगों की व्यक्तिगत आज़ादी, सम्मान और गरिमा के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते !

                                                       लेखक - ध्रुव गुप्ता 
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