व्यंग्य / जाति पूछो भगवान की

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गांव में रामचरित मानस कथा का अंतिम दिन था। जवार के लगभग दो हजार लोग एकत्र थे। स्वामी नित्यानंद भगवान विष्णु के दशावतारों की आध्यात्मिक व्याख्या कर रहे थे। कलियुग में हो रहे पापों की संक्षिप्त सूची पढ़ने के बाद उन्होंने घोषित किया कि कलियुग अब अपने अंतिम चरण में है। किसी भी दिन भगवान का कल्कि अवतार संभावित है और शास्त्रों के अनुसार इस बार उनका जन्म किसी ब्राह्मण कुल में होगा।
उनका यह कहना था कि श्रोताओं के बीच हलचल बढ़ गई।अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के प्रखंड सचिव राणा लखपति सिंह ने उठकर कहा, '' स्वामी जी, हमारी जानकारी के अनुसार भगवान इस बार भी किसी क्षत्रिय वंश में अवतार लेंगे। उन्होंने सदा क्षत्रिय कुल में ही अवतार लेना पसंद किया है। राम, कृष्ण,बुद्ध और महावीर के उदाहरण सामने हैं। दुनिया से पाप का नाश करने के लिए बुद्धि के अलावा बल और युद्ध-कौशल की भी दरकार होती है। ये चीजें किसी क्षत्रिय के घर में ही मिलेंगी, ब्राह्मण की कुटिया में नहीं। ''
उनकी बात ख़त्म होते ही पंडित गजाधर तिवारी उठ खड़े हुए। उन्होंने लखपति सिंह को ललकारते हुए कहा, '' बाबू साहेब छत्रियों की बल-बुद्धि का ढिंढोरा पीटते समय आप भूलिए गए की भगवान ने परशुराम के रूप में ब्राह्मण कुल में पैदा होकर पिरिथवी से छत्रियों का नाश किया था। वैसे भी कलजुग में आप छत्री लोगों से ही दुनिया में पाप बढ़ा है। आप के घर पैदा होकर भगवान धरती से पाप कैसे मेटा सकते हैं ? ''
तिवारी जी द्वारा क्षत्रियों को पापी कहना था कि सत्संग में हंगामा हो गया। पिछले पंचायत चुनाव में मुखिया पद के पराजित उमीदवार रामआसरे यादव ने हंगामा शांत कराते हुए कहा, '' बाबू लखपति सिंह ने किशन भगवान को छत्री कहा। वे यादव थे। बाबू साहेब उनको जदि छत्री मानते हैं तो हम यादव लोगों को छत्री मानने से काहे इनकार करते हैं ? पहले इस बात का फैसला कर लिया जाय। ''
उनकी इस बात पर उपस्थित यादवों ने खूब तालियां बजाई।
जवाब देने के लिए लखपति सिंह फिर खड़े हुए, '' हम आपको क्षत्रिय मान भी लें तो आपके नेता इस बात को कबूल नहीं करेंगे। ऐसा करने से आपका पिछड़ों के साथ छब्बीस परसेंट वाला आरक्षण जो चला जायेगा तेल लेने ! ''
सत्संग में जोरदार हंसी गूंजी। हंसी थमते ही जयनंदन शाही उठे, '' भगवान जी हरमेसा ब्राह्मण और छत्री कुल में ही औतार काहे लेंगे ? देश का भूमिहार क्या एतना गया-बीता है ? ईमानदारी की बात है कि छत्री और ब्राह्मण के बाद अबकी दफा भूमिहारे की बारी है। ''
गांव के दलित नेता शिवमुनि राम से न रहा गया। उन्होंने बुलंद आवाज़ में ऐलान किया, '' भगवान कौनो छत्री, बाभन, भुईहार की जमींदारी में बसते हैं का ? उनके लिए सब बराबर है। आने वाला जुग हम दलितों का है। भगवान का कल्कि औतार अबकी कौनो दलित परिवार में होगा जो सबरनों का नास कर रामराज की असथापना करेगा। ''
जयनंदन शाही चिल्लाया, '' हमारे होते कौनो बैकवर्ड, दलित में एतना कूबत नहीं है कि वो औतार पैदा कर सके। अपनी औकात देखके बात करिए आपलोग ! ''
इस बात पर शिवमुनि राम उखड़ गए। उन्होंने चुनौती दे डाली, '' जदि भगवान इस बार कौनो दलित के यहां पैदा होकर आप ब्राह्मण, छत्री, भूईहार का विनास नहीं किए तो हम कसम खाते हैं कि नेतागिरी छोड़ के घर बईठ जाएंगे। ''
सवर्णों के विनाश की बात पर सत्संग में बवाल हो गया। सवर्णों और दलितों के बीच लाठियां चली और भगदड़ मच गईं। भागते हुए स्वामी नित्यानंद जी की धोती खुली तो उन्होंने शाप दे दिया, '' हे भगवन ! चाहो तो पाकिस्तान, चीन, श्रीलंका चले जाना। कुकर्मियों के इस देश में कभी मत आना ! ''
गांव के पुराने साहूकार अशर्फी साह भागने के बजाय पास की एक झाड़ी में घुस गए। लगे हाथ दिसा-मैदान से फारिग होते-होते वे बड़बडाये , '' साला भारी फेरा है। साफ-साफ कुछ समझ में नहीं आ रहा कि भगवान इस दफे कौन जात में औतार लेंगे। पहिले से कुछु मालूम रहे तो आदमी जोगाड़ बईठा के रखे। अभी तो बुझाता है कि चुप रहके तमाशा देखे में ही भलाई है। ''

                                                           
                                                                    लेखक - ध्रुव गुप्ता 
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