मीडिया का बदलता स्वरुप

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गणेश शंकर विधार्थी को पत्रकारिता  का जनक माना जाता है .उन्होंने पत्रकारिता  को निष्पक्ष  और जनता की आवाज के रूप में बुलंद किया था पर उनको क्या पता था की आज पत्रकारिता एक बड़े व्यवसाय का रूप ले लेगी | जिस प्रकार से इलेक्ट्रानिक  मीडिया कार्य कर रही है वो तो कहीं से भी पत्रकारिता को अनुसरण नही कर रही वो केवल बिकी न्यूज (टीआरपी  और व्यवसाय के लिए ) और मसाला टाइप ही न्यूजों  को दर्शाती है ,कभी जनता का का इस पर पूर्ण विश्वाश हुआ करता था पर आज के समय में यह पूर्ण विश्वाश,  अविश्वाश में परिवर्तित नजर होता आ रहा  है यदि हम ताजा उदाहरण ही हम उठा ले तो अन्ना का अनशन जब दिल्ली से हुआ तो इलेक्ट्रानिक मीडिया ने बड़ी तेज़ी से कवर किया और सकारात्मक पहलू ही गिनाये पर जब वहीँ अनशन मुम्बई में हुआ तो नकरात्मक पहलू  छोड़कर किसी सकरात्मक  पहलू पर चर्चा करती  नजर नही आयी |

आखिर  हम पत्रकार कर ही क्या सकते है क्योंकि  हम भी संस्थागत किसी प्रोडक्शन और किसी मीडिया हाउस  में कार्य करते है, और अपने द्वारा किये गये कार्य का मेहनताना लेते है इसलिए हमें वही करना होता  है जो हमे ऊपर से निर्देश दिए जाते हैं ,क्योंकि हम उनके आधीन होतें हैं ,पुरानी कहावत में कहा भी गया है जिसकी लाठी उसकी की भैंस | सीमित शब्दों में कहा जा सकता है की पत्रकारिता अब असहज हो गयी है क्योंकि एक धीरे -धीरे व्यवसाय का रूप ले चुकी है और कहा भी जाता है कि व्यापार में सब कुछ जायज है |

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