आस्था के नाम पर होता जनता की भावनाओ से खिलवाड़

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भारत हमेशा से ही संत, महात्माओ का देश रहा है और इतिहास में कई ऐसे ज्ञानी और संपूर्ण लोग हुए है जिन्हें संत, महात्माओ की पदवी से नवाजने में कोई कठिनाई न हुई ,  परन्तु आज के समय में कुछ लोगो ने संतो के नाम को भी दागदार कर दिया है ,आज के समय में  ये आम बात होती नज़र आ रहीहै की  जब की किसी भी बाबा और संत कहे जाने वाले पर ठगी,अभद्रता और कुप्रचार के आरोप लगते हों |
 जहाँ एक ओर राजकोट में स्वामीनारायण सम्प्रदाय के एक बाबा उसी संप्रदाय की महिला के साथ पकडे गए, वहीँ आंध्र प्रदेश के ईसाई धर्म के प्रचारक क. ए. पॉल को पोलिसे ने उनके ही भाई के क़त्ल के जुर्म में पोलिसे ने हिरासत में ले लिया है | वही दूसरी ओर भक्तो से धोका धडी के आरोप के मामले में घिरे निर्मल बाबा को फिलहाल पटना हाई कोर्ट से कुछ दिनों की राहत मिली है |
तोह आखिर कब तक ऐसे ढोंगी बाबा हमारे देश की जनता को बेवकूफ बनाते रहेंगे और कब तक इस देश की जनता आंख बंद करके ऐसे बाबाओ पर विश्वास करती रहेगी |क्या ऐसे मामलो में सरकार को हस्तक्षेप करके ऐसे ढोंगी बाबाओ के खिलाफ कड़ी कार्यवाही नहीं करनी चाहिए |
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