मैंने बचपन में एक कहानी सुनी थी कि देश कि प्रकृति अपने राजा पर निर्भर करती है । ये कहानी मै आपके साथ भी सेयर करना चाहूंगी ।
एक बार राजा अकबर शिकार के लिए बाहर निकले। रास्ते में उन्हें जोरों कि प्यास लगी । वे एक खेत के पास पहुंचे । खेत गन्ने कि खेती से लहलहा रहा था । किसान इन खेतों पर न के बराबर लगान देते थे । वहां किसान आया और राजा को बिठाया वह अपने देश के राजा को शकल से न पहचानता था । राजा के प्यास के बारे में पता चलने पर वह तुरंत जाकर २ गन्नो का लोटे भर ताजा ताजा रस ले आया । राजा ने गन्ने का रस पिया और उसकी प्यास को राहत मिली । इस पर राजा ने गन्ने कि बहुत तारीफ़ की । जवाब में किसान ने कहा जनाब ये सब गन्नों का नहीं मेरे राजा की नियत का कमाल है। मेरे राजा की नियत जरूर साफ़ और दयालु होगी तभी इन गन्नों के रस में भी मिठास है ।
राजा ने मन ही मन सोचा कि आज ही खेतों का लगान मै तिगुना कर दूंगा । इतना कहकर उसने किसान से फिर गन्ने का रस लाने को कहा । इस बार किसान काफी देर बाद वापस आया और वो भी लोटे में ४ गन्नों का बहुत थोडा सा रस लेकर । राजा बोला इस बार आपको इतनी देर क्यों हो गई और रस भी थोडा सा ही लाये हो ? जवाब में किसान ने कहा कि जरूर मेरे राजा की नियन बिगड़ गई होगी। तभी मेरे गन्नों से इतना कम रस निकला है । राजा के बात समझ में आ गई उसने लगान न लगाने का सकल्प किया और किशान के खेत फिर से खुशाल हो गए ।
भारत की हालत भी कुछ ऐसी ही है । इस साल देश में ५ राज्यों में सूखा घोषित कर दिया गया । देश में २५ से ३० % तक कम बारिश हुई । मेरे देश के मालिक की नियत इससे साफ़ पता चल जाती है ।
ऐसी भ्रष्ट सरकार का असर प्रकृति क्या जन जन पर पड़ेगा ।
स्वाति गुप्ता
एक बार राजा अकबर शिकार के लिए बाहर निकले। रास्ते में उन्हें जोरों कि प्यास लगी । वे एक खेत के पास पहुंचे । खेत गन्ने कि खेती से लहलहा रहा था । किसान इन खेतों पर न के बराबर लगान देते थे । वहां किसान आया और राजा को बिठाया वह अपने देश के राजा को शकल से न पहचानता था । राजा के प्यास के बारे में पता चलने पर वह तुरंत जाकर २ गन्नो का लोटे भर ताजा ताजा रस ले आया । राजा ने गन्ने का रस पिया और उसकी प्यास को राहत मिली । इस पर राजा ने गन्ने कि बहुत तारीफ़ की । जवाब में किसान ने कहा जनाब ये सब गन्नों का नहीं मेरे राजा की नियत का कमाल है। मेरे राजा की नियत जरूर साफ़ और दयालु होगी तभी इन गन्नों के रस में भी मिठास है ।
राजा ने मन ही मन सोचा कि आज ही खेतों का लगान मै तिगुना कर दूंगा । इतना कहकर उसने किसान से फिर गन्ने का रस लाने को कहा । इस बार किसान काफी देर बाद वापस आया और वो भी लोटे में ४ गन्नों का बहुत थोडा सा रस लेकर । राजा बोला इस बार आपको इतनी देर क्यों हो गई और रस भी थोडा सा ही लाये हो ? जवाब में किसान ने कहा कि जरूर मेरे राजा की नियन बिगड़ गई होगी। तभी मेरे गन्नों से इतना कम रस निकला है । राजा के बात समझ में आ गई उसने लगान न लगाने का सकल्प किया और किशान के खेत फिर से खुशाल हो गए ।
भारत की हालत भी कुछ ऐसी ही है । इस साल देश में ५ राज्यों में सूखा घोषित कर दिया गया । देश में २५ से ३० % तक कम बारिश हुई । मेरे देश के मालिक की नियत इससे साफ़ पता चल जाती है ।
ऐसी भ्रष्ट सरकार का असर प्रकृति क्या जन जन पर पड़ेगा ।
स्वाति गुप्ता
