पुराने समय में जब रजा,महाराजाओ के समय में जब कोई व्यक्ति किसी कुकृत्य का दोषी पाया जाता था तो जनता में उस कुकृत्य की सजा का भय व्याप्त करने के लिये उस दोषी की सजा को सार्वजानिक करते थे ताकि लोग उस सजा को देखकर सबक ले, और भविष्य में कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार का अपराध करने से पहले उस सजा के बारे में एक बार जरूर सोंच ले ।
बुधवार 21 नवम्बर ऑपरेशन एक्स को बड़ी ही गोपनीयता से अंजाम दिया गया और कसाब की फांसी बड़े ही चौका देने वाली खबर की तरह दुनिया के सामने आयी और साथ में जिस तरह गोपनीय रखा गया उसी तरह की फांसी को भी सार्वजानिक न करके अभी तक गोपनीय रखा गया है । गौरतलब है की इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन को जब अमेरिका में फांसी दी गयी थी तब सद्दाम की फांसी का वीडियो सार्वजानिक किया गया था, जिससे कहीं न कहीं इराक के लोग जिन पर सद्दाम ने ताउम्र अत्याचार किया उन लोगो को एक आत्मिक शांति मिली होगी, क्योंकि इंसान चाहे जितना भी शांत क्यों न हो मगर वह स्वयं पर अत्याचार करने वाले का अंत अपनी आँखों से अवश्य देखना चाहता है ।
भारत जैसे देश में जहां सालो के इंतज़ार के बाद फांसी जैसी सजा किसी अति घ्रणित कुकृत्य करने वाले दोषी को दी जाती है, वहाँ यह अति आवश्यक हो जाता है कि उस दोषी की सजा सार्वजानिक किया जाए ताकि बाकी अपराधियों के दिलों में ऐसे कुकृत्य करने का ख़याल भी ना आये । क्योंकि की यह बहुत ज़रूरी है की अगर हम आने वाला कल सुरक्षित करना चाहते है तो उसके लिए हमे कुछ ठोस कदम आज उठाने ही पड़ेंगे वरना वो दिन दूर नहीं होगा जब हम अपने समाज में उस भयानक रूप का आतंकवाद देखेंगे जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं ।

क्या रफ्तार लाईव बताएगा की यह लेख किस सज्जन ने लिखा हैं ?
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