मिलेगा इन्साफ या भयावह होगी जिंदगी ?

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वो मरती रहेगी ता उम्र 
वो कैसे जिएगी ता उम्र?????????

हर नज़र उसका बलात्कार करेगी,
हर नज़र उसपे वार करेगी,
हर नज़र होगी उसकी कत्लगाह,
हर नज़र उसका शिकार करेगी।
वो कैसे सहेगी ता उम्र।
वो मरती रहेगी ता उम्र।।

हमेशा उसे वो मंजर याद आएगा,
नहीं कभी वो दरिंदा, उसे भुला पायेगा,
वो अपने ही जिस्म से नफरत करेगी पल-पल,
हर दिन उसकी जिंदगी का खार खायेगा।
वो उदास रहेगी ता उम्र।
वो मरती रहेगी ता उम्र।।


जीकर भी वो जिन्दा लाश रहेगी,
निःशब्द, निर्दोष और पाक रहेगी,
वो उलझा हुआ सा एक सवाल रहेगी,
अपनी किस्मत के लिए वो "काश" रहेगी 
वो सिसकती रहेगी ता उम्र।
वो मरती रहेगी ता उम्र।।

वो अपनी जिंदगी उधार मांगेगी,
वो अपना बाइज्ज़त संसार मांगेगी,
चार दिवारी में खुद को समेट लेगी शायद,
हर साँस उसकी खुदा से इन्साफ मांगेगी।
वो कैसे लड़ेगी ता उम्र।
वो मरती रहेगी ता उम्र।।

किस गुनाह का उस पर ये असर हो गया,
वो खुदा कितना बेरहम हो गया,
वो पत्थर ही है शायद, उसे रहम नहीं आया,
वो चुप रहा और, इतना बड़ा कहर हो गया।
वो खुदा की ओर नहीं देखेगी ता उम्र।
वो मरती रहेगी ता उम्र।।

मै आज इश्वर से प्रार्थना नहीं कर सकती कि उसकी जिंदगी संवार दो, क्योकि जो कुछ भी हुआ उसमे शायद उसे उसकी नज़रों में कभी इन्साफ मिल पायेगा। पर देशवाशियों से मेरी गुजारिश है कि ये आन्दोलन जारी रहे। जब तक हर लड़की, हर माँ, हर भाई और हर पिता को इन्साफ न मिल जाए और इश्वर हम और आप में से फिर किसी को ऐसी स्थिति में लाकर न खड़ा कर दे।

Written By- Swati Gupta
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