चौतरफा आतंक के सायें में देश और दिल्ली की महिलायें

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देश और दिल्ली में लगातार अपराध जिस तरह अपने कदम जमा रहा है वो अतिनिन्द्नीय है और इसके लगातार बढ़ते कदम इस बात की ओर भी इशारा कर रहे हैं की देश और दिल्ली की जनता भले ही काननों को सख्त करने और अपराधियों पर हर सख्त कार्यवाही करने की मांग करे मगर  हालात तो कुछ और ही बयाँ कर रहे हैं |
महिलाओ पर अत्याचार की ये दास्तान बहुत पुरानी है जो अभी भी थमने का नाम नहीं ले रही | बहादुर लड़की का स्वर्गवास हुए एक महीने हो चुके है मगर देश और देश की राजधानी दिल्ली किसी भी तरह से अभी भी महिलाओं के लिये सुरक्षित होती नज़र नहीं आ रही, वहीँ दिल्ली की हैवानियत की तस्वीर तब सामने आई जब दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने महिलाओं के लिये 181 नंबर पर हेल्पलाइन शुरू करवाई जिस पर अभी तक एक लाख से भी ज्यादा कॉल आ चुके हैं जिनमे घरेलु हिंसा, छेद-छाड़,परेशान करने के मामले हैं, अब आप स्वयं ही समझ सकते हैं की दिल्ली महिलाओ के लिये कितनी असुरक्षित है |
महिलाओ के लिये सबसे बड़ी परेशानी की बात तो ये है की अगर वो खुद ही आगे बढ़कर अपराधियों के खिलाफ कोई सख्त कदम उठती है तो प्रशाशन के कुछ नुमाइंदे उनकी मदद के बजाये उनसे ही इस तरह का व्यहवार करते है मानो वो पीड़िता नहीं खुद ही अपराधी हैं, अगर महिलाए स्वयं हिम्मत करके किसी दुराचारी से भीड़ जाती हैं तो कभी-कभी तो उन्हें उन अपराधियों की मानसिक विकृतियों का शिकार होना पड़ता है जैसे कि आये दिन खबरे सुनने को मिलती है की किसी महिला के विरोध करने पर अपराधी उस पर तेज़ाब तक फेंक देते है, अब ऐसी स्तिथि में महिलाये कहा जाकर अपना दुखड़ा रोयें जब कि वो चौतरफा परेशानियों का शिकार होती हैं |
ऐसी गंभीर परिस्थितियों में हमारे समाज को ही आगे बढ़कर पहल करनी होगी और अपनी बुलंद आवाज़ से एक ओर सोयी हुई क़ानून व्यवस्था को जगाना होगा और दूसरी और ऐसे विकृत मानसिकता वाले अपराधियों को समाज से बाहर खदेड़ना होगा, तभी जाकर हम एक भयमुक्त समाज कि कल्पना कर सकते हैं |
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