कुछ समय पहले जानेमाने शायर निदा फाजली ने अपने एक बयाँ में कसाब की तुलना अमिताभ बच्चन से की थी जिस पर अमिताभ बच्चन के समर्थकों ने काफी रोष प्रकट किया था वहीँ दूसरी तरफ गहराई से समझने वाले कुछ विचारशील लोगो ने इस बात का समर्थन किया था | निदा फाजली ने एक साहित्यिक पत्रिका को लिखे खत में कहा जिस प्रकार अमिताभ बच्चन की “एंग्री यंग मैन” की छवि बनाने वाले सलीम-जावेद को लोगो ने भुला दिया, उसी प्रकार अजमल कसाब को फांसी देने के बाद हमारी सरकार और देश दोनों ने ही इसके पीछे के मास्टर-माइंड हाफिज सईद को भुला दिया |
निदा फाजली के बयान को जिस तरह से लोगो ने समझा वो रवैया अतिसंवेदनहीन रहा, मगर सोचने वाली बात तो ये है कि निदा फाजली के बयान से हमे क्या सीख लेनी चाहिए और किस तरह से इस गंभीर मुद्दे पर अमल करना चाहिये | आज सीमा पर जिस तरह के हालात बन रहे हैं उसके लिये कहीं न कहीं भारत सरकार का संवेदनहीन रवैया जिम्मेदार है और सीमा पर हुई गोलीबारी के लिये अब हाफिज सईद से जोड़ कर देखा जा रहा तो पता चल रहा है कि उस गोलीबारी के तार हाफिज सईद कि ओर इशारा कर रहे हैं |
सोचने वाली बात तो ये है कि किसी विचारशील व्यक्ति के बयान का गलत मतलब निकालकर तूल देने से बेहतर है कि उसके पीछे छुपी गहरायी को समझे और उस पर सकारात्मक रवैया अपनाते हुए कोई फैसला ले जो जनता के हित में हो |
