अब लेखनी मेरी है

RAFTAAR LIVE
0

मैं वेद व्यास नहीं हूँ
ना ही तुलसीदास
और कालिदास की तो
बात ही छोड़ दीजिये
मैं
एक स्त्री हूँ
उस नायिका सम नहीं
जिसका वर्णन
श्रृंगार रस का पर्यायवाची है
बल्कि मैं
एक जीती जागती 
साधारण स्त्री हूँ
जिसने जो भी
जहाँ भी पढ़ा है
उससे यही सीखा है
कि वो स्त्री है
इसलिए मैंने ठान लिया है
कि "दासों" का समय बीत गया
लेखनी अब मैं उठा चुकी हूँ
जिसकी स्याही भी मुझसी ही
साधारण है
इसलिए अब मैं लाऊंगी सबको 
एक धरातल पर
जहाँ शिव को करनी होगी तपस्या
पार्वती को पाने के लिए
और राम को देनी होगी अग्निपरीक्षा
ब्रह्मा नहीं
सरस्वती करेंगी रचना
एक ऐसी सृष्टि की
जहाँ कोई पुत्रेष्टि यज्ञ
नहीं होगा 
जहाँ शकुंतला भूलेगी दुष्यंत का अस्तित्व
और दमयंती करेगी रक्षा
नल की
अब लेखनी मेरी है
तो भविष्य के साथ साथ
इतिहास भी अब
मेरा होगा ।


साभार - प्रेरणा सिंह (रचना फेसबुक वाल से ) Editor at The Stephanian Magazine, St.Stephen's College.
 St. Stephen's College, Delhi से अर्थशास्त्र में अध्ययन कर रहीं है |

Tags

Post a Comment

0Comments
Post a Comment (0)