आस्था के नाम पे ढोंग चरम पर

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पिछले दिनों आशाराम ने भक्तों के साथ होली खेलने के नाम पर हज़ारो लीटर पानी बर्बाद कर दिया और जब सभी तरफ इसका विरोध हुआ तो आशाराम ने हमेशा के लिये अज्ञातवास जाने का एलान कर दिया है और साथ ही अपने विरोधियों और भक्तों से ये भी कह डाला कि उनका विरोध बिना किसी कारण हो रहा है वो जब चाहे कहीं भी वर्षा करा सकते है और पानी की किल्लत को खत्म कर सकते हैं |
आशाराम जी खुद को जनता का बड़ा शुभचिंतक कहते हैं तो क्या उन्हें ये ज्ञात नहीं कि महाराष्ट्र इस समय भीषण सूखे कि चपेट में है और अगर उनके पास सच में चमत्कारी शक्ति हैं तो वो महाराष्ट्र का भला क्यों नहीं कर देते हैं और सिर्फ महाराष्ट्र ही क्यों ये देश ही क्यों पूरी दुनिया में कई जगह सुखा पड़ा है तो अगर आशाराम सच में मानव कल्याण के लिये जीते हैं तो उन सभी की सहायता क्यों नहीं करते है |
बात सिर्फ इतनी नहीं की आशाराम ने क्या गलत कहा और वो क्या गलत कर रहे है बड़ी बात तो ये है कि अपनी आँखों के सामने सच देखने के बाद भी जनता कि आँखों पर ये आस्था का झुटा पत्ता बंधा है और न जाने कब तक जनता आस्था के नाम पर खुद को इन जैसे ढोंगी लोगो से जुड़ती रहेगी | जिस तरह किसी हिंसक कांड में में जितना दोष हिंसा करने वाले का होता है उतना ही दोष हिंसा सहने वाले का होता है उसी तरह अगर आशाराम जैसे ढोंगी लोग जनता को तभी ठग सकते है जब जनता उन्हें ये मौका देती है,  हमे इस वक्त आवश्यकता है एक ऐसी सोंच कि जो समाजा को नै दिशा के साथ-साथ नै दशा भी दे सके |
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